12 Working Stress Management Techniques In Hindi | तनाव प्रबंधन तकनीक | Digital TK

तनाव का संबंध व्यक्ति की मानसिक स्थिति से होता है । कार्य के दबाव एवं समय की कमी के चलते व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसे अन्य शब्दों में हम तनाव कह सकते हैं । तनाव से पीड़ित व्यक्ति की मानसिक स्थिति को असंतुलित कर देता है । जिसके परिणाम स्वरूप व्यक्ति का की एकाग्रता भंग हो जाती है इसके साथ ही थकान का अनुभव करना है छोटी- चोटी पर भी उसे गुस्सा आने लगता है। ऐसा लंबे समय तक चलता है । वह किसी भी को करने में अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है।

मानसिक स्वास्थ्य का असर सापेक्ष रूप से व्यक्ति के शरीर पर भी पड़ता है। तनाव के समय शरीर में विभिन्न प्रकार के तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन जिनमें एंड्रालीन और कोर्टिसेाल के स्तर में अभिवृद्धि होती है। जिससे कि थोड़े से भी कार्य करके व्यक्ति को थकान की अनुभूति होने लगती है। तनाव की स्थिति में व्यक्ति की कार्यक्षमता सर्वाधिक प्रभावित होती है। जिससे कि उसका विकास रुक जाता है ।

तनाव से बचने के लिए व्यक्ति को चाहिए कि वह समय को नियोजित तरीके से खर्च करें।अत्याधुनिक तकनीकी से जुड़े । इसके साथ ही अपने खानपान एवं व्यायाम को भी अपनी प्राथमिकता में शामिल करें। ऐसा करने से भावी समय में उसे तनाव की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा, यदि किसी कारणवश वह तनाव भी ग्रस्त हो गया है, तो ऐसे में तनाव प्रबंधन की तकनीकी उससे उबरने में काफी कारगर सिद्घ हो सकता है। चलिए हम जानते हैं, कुछ तनाव प्रबंधन तकनीकी के विषय में जिसे अपनाकर आप अपना निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

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1. ओम ध्वनि की आवृत्ति से

भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका जैसे उन्नत उन्नतशील देश तकनीकी को आजमा चुके हैं। जिसका परिणाम बेहद ही संतुष्टि जनक रहा है ।सुबह के समय एवं शाम के समय 20 मिनट तक गहराई से ओम शब्द के उच्चारण मात्र से व्यक्ति के मस्तिष्क ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि पाई गई। जिसके परिणाम स्वरूप पहले की अपेक्षा व्यक्ति के कुछ हार्मोन सकारात्मक परिवर्तन देखा गया।

2. रंगों के माध्यम से तनाव निवारण

साइंटिफिक तौर पर यह प्रमाणित हो गया है कि मनुष्य की मानसिक स्थिति को ठीक करने के लिए कुछ रंग काफी सहायक होते हैं। यह व्यक्ति को अवसाद की मुद्रा उबारने में सहायक सिद्ध होते हैं।यह मनुष्य के मस्तिष्क को नई ऊर्जा से भर देते हैं अर्थात व्यक्ति की मूड में सकारात्मक परिवर्तन देखे गए जैसे कि सफेद रंग मूड को शांत रखने एवं लाल लाल रंग व्यक्ति में ऊर्जा का संचार करने में सहायक है।

3. समय प्रबंधन पर विशेष बल दे

व्यक्ति के जीवन में समय प्रबंधन बेहद अहम भूमिका निभाता है। समय प्रबंधन के माध्यम से व्यक्ति अपने निर्धारित लक्ष्य को बेहद सहज और अल्प समय में पूर्ण करने में सफल हो जाता है। समय प्रबंधन से व्यक्ति को न केवल आर्थिक मजबूती मिलती है। अपितु यह व्यक्ति की मानसिक तनाव को भी कम करने में सहायक है। एक अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी तनाव प्रबंधन बेहद आवश्यक है ।

4. सुगंध के माध्यम से (Best Stress Management Techniques In Hindi)

सामान्य तौर पर देखा गया ह कि व्यक्ति को किसी विशेष प्रकार की सुगंध बहुत अच्छी लगती है।उसके सुगंध मात्र से वह स्वयं को तरोताजा महसूस करता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी किया सुगंध व्यक्ति के मूड को परिवर्तित करने में भी काफी सार्थक सिद्ध होती है। तनाव की स्थिति में यदि व्यक्ति स्वयं के कपड़ों एवं घर के किसी भी कोने में मनपसंद सुगंधित वस्तु रख देता, तो उसके आसपास का वातावरण परिवर्तित हो जाता है। इसके साथ ही व्यक्ति केवल मन मस्तिष्क पर भी इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है।

5. आत्म चिंतन के द्वारा

तनाव के दौरान व्यक्ति के मन में तरह-तरह के नकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं जिससे कि व्यक्ति चारों से घिर जाता है। उस समय उसके मन मस्तिष्क में केवल नेगेटिव विचार ही उत्पन्न होते हैं, जिसके चिंतन से व्यक्ति की आयु एवं स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है । अतः यह बेहद आवश्यक है कि व्यक्ति को नकारात्मक चिंतन ना करके उसके स्थान पर सकारात्मक चिंतन करें जिससे कि तनाव का उस पर किसी भी प्रकार का प्रभाव ना पड़े। सकारात्मक दृष्टिकोण उसके जनजीवन पर अच्छा प्रभाव डालते हैं।

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6. आहार के माध्यम से

जैसा कि हमारे शरीर को ऊर्जा आहार से प्राप्त होती है। एक स्वस्थ शरीर का निर्माण आहार से ही होता है, जिससे कि हम गतिशील होकर अपना अपना कार्य करते हैं। भोजन से हमें तरह-तरह के पोषक तत्व प्राप्त होते हैं । आहार का चयन करते समय हमें चाहिए जिससे मुझे पदार्थों को आहार में शामिल करें जिससे हमारे मस्तिष्क को शांति एवं स्फूर्ति का संचार हो सके। जैसे कि काजू ,अखरोट ,बादाम ,अजीर, अलसी, हरी सब्जियां आदि। इसके साथ ही मौसमी फल आदि को प्राथमिकता दे। शरीर पर दुष्प्रभाव डालने वाली आज आदतों को तत्काल रुप से बदल देना चाहिए ,जैसे कि शराब का नशा एवं धूम्रपान यह सभी शरीर में जाकर ऑक्सीजन के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं। जिसके फलस्वरूप तनाव को बढ़ावा मिलता है।

7. स्थान परिवर्तन के द्वारा

कभी-कभी कार्य के दौरान व्यक्ति अरुचि का शिकार हो जाता है। लंबे समय से किसी को कार्य को करना एवं समय की कमी के कारण व्यक्ति तनाव का शिकार हो जाता है। जिससे उसकी कार्यक्षमता में पहले की अपेक्षा गिरावट आती है और उसे किसी भी कार्य को करने हमें कठिनाई होने लगती है। कार्य के संपन्न ना होने पर व्यक्ति आवेश में आ जाता है और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लग जाता है। ऐसे में व्यक्ति को चाहिए कि वह कुछ समय के लिए अपने कार्य क्षेत्र से छुट्टी लेकर किसी हिल स्टेशन या प्राकृतिक स्थान पर कुछ समय तक भ्रमण करें जिससे कि उसका दिमाग को शांति मिले। ऐसा करने से वह पहले की तरह कार्य के प्रति समर्पित हो जाएगा।

8. योगिक क्रियाओं के माध्यम से

जैसा कि हम जानते हैं, शरीर को ऊर्जा प्राप्त करने के लिए आहार की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही शरीर को निरोगी रहने के लिए योगिक क्रियाओं की आवश्यकता होती है, और यह व्यक्ति के ऊपर ही निर्भर करता है कि कार्य के मध्य थोड़े समय के लिए किया योगिक क्रियाओं को भी प्राथमिकता दें। शरीर को स्वस्थ बनाए रखने एवं तनाव से बचाए रखने के लिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में योगिक क्रियाओं को विशेष रूप से शामिल करना चाहिए। उन योगिक क्रियाओं में कपालभाँति ,अनुलोम -विलोम ,प्राणायाम और भ्रामरी आदि को शामिल कर सकते हैं।

9. संगीत के माध्यम से

मनुष्य के मस्तिष्क को तरोताजा करने के लिए संगीत भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। तनाव की स्थिति में यदि व्यक्ति को उसके मन पसंदीदा संगीत सुनने को मिल जाए तो कहीं ना कहीं वह संगीत के माध्यम से उसके चित्त नकारात्मक विचारों से से मुक्त हो जाता है। इसके साथ ही उसके मन को सकारात्मक विचारों की ओर विकेंद्रीकरण का कार्य करता है| जिससे कि उसकी सृजनात्मक शक्ति का विकास होता है। इसके अतिरिक्त उसकी कार्यक्षमता में किसी भी प्रकार की गिरावट नहीं आती है। संगीत से व्यक्ति मन खुशी से भर जाता है। उस दौरान शरीर से एक विशेष तरह का हार्मोन कार्टीसोल का बनना कम हो जाता है। जोकि तनाव उत्पन्न करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।

10. काम के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेते रहे

कभी- कभी कार्यक्षेत्र में कार्य करने के दौरान हमारी रुचि पहले की अपेक्षा कुछ कम हो जाती है ,जिसके चलते कार्य को हम निर्धारित समय पूरा नहीं कर पाते ,परिणाम स्वरूप तनाव में आ जाते हैं। बात बात पर व्यक्ति व्यथित होकर गुस्सा करने लग जाता है। इस समस्या के समाधान हेतु हमें चाहिए कि वह कार्य के मध्य थोड़े समय के लिए विराम लेता रहे, जिससे कि व्यक्ति का मस्तिष्क को तरोताजा हो सके। इसके साथ ही व्यक्ति अरुचि का शिकार होने से बच जाएगा।

11. अल्बर्ट एलिस की तकनीकी के द्वारा

अल्बर्ट एलिस एलिस एक मनोवैज्ञानिक थे, इन्होंने एबीसी तकनीकी बनाई थी। कुछ समय उपरांत मार्टिन सेलिगमैन ने इस तकनीकी को प्रयोग में लाया। एबीसी से पर्याय प्रतिकूलता अर्थात तनाव को मूल रूप से घटाना, बी सिर्फ विश्वास एवं सी का आश्रय परिणाम से होता है। कहने का अभिप्राय यह है ,कि व्यक्ति जितना अधिक उम्मीद एवं विश्वास के साथ कार्य करेगा उससे ही सकारात्मक परिणाम मिल सके।

12. सौम्य एवं लचीले बने

मानव मस्तिष्क विभिन्न प्रकार के विचार का समागम होता रहता है। तनाव की स्थिति में व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचारों की अभिवृद्धि होती है | ऐसे में व्यक्ति सोचने समझने की क्षमता निष्क्रिय हो जाती है। उसकी कार्यक्षमता में सृजनात्मकता की कमी पाई जाती है। ऐसे में इन सभी भावी परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यक्ति को लचीला होना चाहिए| लचीले व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में अपनी त्रुटियों स्वीकार करके उसमें सुधार की ओर उन्मुख होते हैं। जिससे कि उसके जीवन में बड़ी-बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। तनाव से बाहर निकलने के लिए व्यक्ति का सौम्य एवं लचीला होना बेहद आवश्यक है।

Conclusion (Stress Management Techniques In Hindi)

आजकल के समय मैं अपने आपको तनाव से दूर रखना बहुत ही बड़ी प्रॉब्लम बन चुकी है| इन सब तकनीकों का उपयोग करके आप अपने आप को तनाव से दूर रख सकते हैं| उम्मीद करते हैं आप सही तरह से जान गए होंगे कि स्ट्रेस मैनेजमेंट क्या होता है और हम कौन-कौन से टेक्निक लगाकर अपने स्ट्रेस को मैनेज कर सकते हैं और अपनी प्रोडक्टिविटी को पढ़ा सकते हैं|

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